संत गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते है- सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी। सत्तर जन्म कटत हैं शीशम, साक्षी साहिब हैं जगदीशम।। सुरापान व मांस आदि खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इससे त्यागने में ही भलाई है। नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। इस का किसी भी शास्त्र में उल्लेख नहीं कि नशा करें। यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है। शराब मानव जीवन बर्बाद करती है। इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं- भांग तम्बाकू छोतरा, आफू और शराब कह कबीर कौन करे बंदगी, ये तो करें खराब। शराब भक्ति का नाश करती है। इसे त्यागने में ही भलाई है।