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Acche Samaj ka Nirman kaise hoga

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संत रामपाल जी महाराज अच्छे समाज का निर्माण कर रहे हैं क्युकी संत रामपाल जी महाराज से जो भी व्यक्ति नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करता है तो वह व्यक्ति हर प्रकार का नशा छोड़ देता है, और अब वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर लाखों लोगों ने नशा छोड़ दिया है। अन्य  प्रकार की बुराई  चाहे वह  सामाजिक हो या व्यक्तिक बुराई छोड़ देता है  । संत रामपाल जी के अनुयाई किसी भी प्रकार की बुराई नहीं करते हैं और न ही किसी प्रकार की चोरी ठगी रिश्वत आदि नहीं लेते हैं और न हीं समाज में प्रचलित बुराइयों से दूर रहते हैं जैसे दहेज नही लेना संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई दहेज मुक्त शादी करते हैं एक नशा करने वाला व्यक्ति और राक्षस में कोई अंतर नहीं होता क्योंकि नशा करने के बाद इंसान राक्षस ही बन जाता है और अपनी जिंदगी को बर्बाद कर रहा होता है इसलिए सर्व बुराई को त्याग कर इंसान का जीवन जीयो!!! Must watch Sadhna TV 07:30 pm सच्चा सतगुरु अपने सत्य ज्ञान से स्वच्छ समाज का निर्माण करता है। संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में पाखण्ड मुक्त, नशा मुक्त, दहेजमुक्त, भ्रष्टाचार म...

Sachi bhakti se moksh aasan hai

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जगन्नाथ मंदिर में मूर्तिपूजा नहीं होती है, मूर्तियां केवल दर्शनार्थ रखी गई हैं। और हिंदुस्तान का जगन्नाथ मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है जिसमें किसी भी प्रकार की छुआछात नहीं होती है। लेकिन जगन्नाथ मंदिर में जाने से मुक्ति पाना आसान नहीं है परन्तु आत्म कल्याण तो यानी की मोक्ष तो केवल पवित्र गीता जी व पवित्रा वेदों में वर्णित तथा पूर्ण गुरु के द्वारा बताई गई सत भक्ति से ही मोक्ष मिल पाना आसान यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन  करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है। ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज ही  जो कि पवित्र वेदों के अनुसार साधना करवा रहे हैं संत रामपाल जी महाराज के   द्वारा दिए तत्वज्ञान के अनुसार भक्ति साधना करने मात्र से ही सम्भव है, अन्यथा शास्त्र विरुद्ध होने से मानव जीवन व्यर्थ हो जाएगा। आज वर्तमान सच्ची भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज ही कबीर परमेश्वर के द्वारा दिए गए दिए गए तत्वज्ञान वह पवित्र वेदों तथा गीता जी के अनुसार शास्त्र अनुकूल साधना करवा रहे हैं जिससे मुक्त...

Siri karshan ji

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आखिर क्या कारण था की श्री कृष्ण जी के पांडवों के द्वारा की गई अश्वमेघ यज्ञ में उपस्थित रहेंने के बाद भी सम्पूर्ण नहीं हुआ। तो फिर वह  यज्ञ  किसने सम्पूर्ण करवाई थी वह यज्ञ सुपच सुदर्शन के रूप में कबीर परमात्मा ने  संपूर्ण करवाई थी। क्या मीराबाई ने श्री कृष्ण जी की आजीवन भक्ति की थी।  सच्चाई है कि मीराबाई ने कबीर परमेश्वर का सत्संग मीरा बाई ने कबीर परमेश्वर का सत्संग सुनने के बाद श्री कृष्ण की भक्ति को त्यागकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति करके अपना जीवन सफल बनाया था ।  क्योंकि श्री कृष्ण तीन लोक के स्वामी है और वो स्वयं जन्म मरण के चक्कर में आते है उनकी साधना करने से जीव की मुक्ति संभव नहीं।  पूर्ण मोक्ष सिर्फ कबीर परमेश्वर की भक्ति से ही संभव हैं  अधिक जानकारी के लिए देखें साधना चैनल रात्रि 7:30 बजे

Parmatma sakar hai

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सर्व सृष्टि रचनहार कबीर परमात्मा पवित्र बाइबल में उत्पत्ति ग्रंथ में पृष्ठ नं 2 अध्याय 1:20 व 2:5 में परमेश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार उत्पन्न किया नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की। कबीर परमात्मा ने ही 6 दिन में सृष्टि रची बाईबल उत्पत्ति ग्रंथ 1:26 - 2:3 में प्रमाण है कि कबीर परमेश्वर ने 6 दिन में सर्व सृष्टि रचकर सातवें दिन विश्राम किया तथा मनुष्यों की उत्पत्ति अपने स्वरुप के अनुसार की।

GodKabir_PrakatDiwas_2020

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ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से नीरू-नीमा परमेश्वर कबीर जी को अपने घर ले आये। गरीब, काशीपुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार। मोमन कूं मुजरा हुआ, जंगल में दीदार।। स्वामी रामानंद जी ने अष्टानन्द जी से कहा, जब कोई अवतारी शक्ति पृथ्वी पर लीला करने आती है तो ऐसी घटना होती है।

KabirPrakatDiwasNotJayanti

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Rigved mandal 9, sukt 96 mantra 17 says that supreme god kabir never takes birth he comes from satlok directly in form of a child and he doesn't die. He go to satlok with body That's why prakat diwas is celebrated instead of kabir jayanti

DivinePlay_Of_GodKabir

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एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई। गरीब, पीतांबर कूं पारि करि, द्रौपदी दिन्हीं लीर। अंधे कू कोपीन कसि, धनी कबीर बधाये चीर।